कोई भी आपको सफलता का ऋणी नहीं है
Page 11: आपकी खुद से बातचीत आपका भविष्य तय करती है
आप दिन भर सबसे ज्यादा किससे बात करते हैं?
खुद से।
लेकिन अक्सर यह बातचीत कैसी होती है?
- “मैं नहीं कर सकता।”
- “मैं उतना अच्छा नहीं हूँ।”
- “मेरे बस की बात नहीं है।”
धीरे-धीरे यह शब्द आपकी सच्चाई बन जाते हैं।
शब्द क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आपका मस्तिष्क बार-बार सुनी हुई बातों को सच मानने लगता है।
अगर आप खुद को कमजोर कहेंगे, तो आपका व्यवहार भी वैसा ही हो जाएगा।
सच्चाई
कोई भी बाहर से आपको उतना नुकसान नहीं पहुँचा सकता,
जितना आपकी नकारात्मक सोच पहुँचा सकती है।
ग्यारहवीं समझ
अपनी भाषा बदलें,
आपका जीवन बदलना शुरू हो जाएगा।
- “मैं सीख रहा हूँ।”
- “मैं बेहतर हो सकता हूँ।”
- “मैं कोशिश करूँगा।”
चिंतन
“मैं अपने आप से कैसी भाषा में बात करता हूँ?”
यही आपकी अगली ऊँचाई तय करेगी।
— Message Series | Shaktimatha Learning —
No comments:
Post a Comment